NEET UG 2026 – डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले हर छात्र के लिए NEET (नीट) परीक्षा जीवन का सबसे बड़ा और अहम पड़ाव होता है। सालों की मेहनत, रातों की नींद और ढेर सारी किताबों को खंगालने के बाद जब नीट का रिजल्ट आता है, तो हर छात्र और उसके माता-पिता के मन में बस यही सवाल घूमता है कि “इस बार कट-ऑफ क्या रहेगा? काउंसलिंग कैसे कराएं? और अगर नंबर थोड़े कम रह गए, तो किस कॉलेज में एडमिशन लें?”
अक्सर इंटरनेट पर मौजूद जानकारी इतनी भारी और अंग्रेजी के कठिन शब्दों में होती है कि आम आदमी उसे पढ़कर और ज्यादा कन्फ्यूज हो जाता है। इसीलिए, आज के इस आर्टिकल में हम बिल्कुल अपनी आम बोलचाल की भाषा में NEET UG 2026 से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को समझेंगे।
कोई भारी-भरकम शब्द नहीं, बस वही बातें जो आपके लिए जाननी सचमुच जरूरी हैं। हम यह भी बात करेंगे कि कम नंबर आने पर आपको किस तरह का कॉलेज चुनना चाहिए और सरकारी या प्राइवेट कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई करने में आपकी जेब से कितना पैसा खर्च होने वाला है। तो चलिए, बिना किसी देरी के शुरू करते हैं |
NEET UG 2026 का असली कट-ऑफ क्या है?
सबसे पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि ‘कट-ऑफ’ (Cut-Off) होता क्या है। बहुत से लोग कट-ऑफ का मतलब सरकारी कॉलेज में मिलने वाली सीट से जोड़ लेते हैं, जो कि गलत है। कट-ऑफ का सीधा सा मतलब है वह कम से कम नंबर, जो आपको यह परीक्षा पास करने (Qualify करने) के लिए चाहिए।
NEET 2026 के रिजल्ट में पासिंग मार्क्स में पिछले साल (2025) के मुकाबले बहुत बड़ा उछाल देखने को मिला है। इस साल का टॉप स्कोर पूरे 715 नंबर (720 में से) रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि कुल मिलाकर इस बार लगभग 11.21 लाख बच्चों ने परीक्षा पास की है।
NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने NEET UG 2026 के लिए जो पासिंग कट-ऑफ जारी किया है, वह कुछ इस तरह है:
जनरल (UR) और EWS वर्ग
अगर आप सामान्य वर्ग से आते हैं, तो पास होने के लिए 50वां परसेंटाइल (50th Percentile) चाहिए। आसान शब्दों में कहें तो आपको 720 में से कम से कम 213 नंबर लाने ही होंगे। (इसकी कट-ऑफ रेंज 715 से 213 के बीच है)।
OBC, SC, और ST वर्ग
अगर आप इन आरक्षित वर्गों में आते हैं, तो आपके लिए 40वां परसेंटाइल तय किया गया है। यानी परीक्षा पास करने के लिए आपके कम से कम 177 नंबर होने चाहिए। (इनकी रेंज 212 से 177 नंबर रखी गई है)।
विकलांग (PwBD) वर्ग
जनरल और EWS विकलांग वर्ग के लिए 194 से 212 नंबर (45वां परसेंटाइल) का कट-ऑफ है। वहीं, OBC-PwBD और SC-PwBD के लिए 177 से 193 नंबर, और ST-PwBD उम्मीदवारों के लिए 178 से 191 नंबर कट-ऑफ तय किया गया है।
यह सिर्फ ‘पासिंग’ नंबर है। 213 या 177 नंबर लाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल ही जाएगा। यह नंबर सिर्फ आपको काउंसलिंग के फॉर्म भरने के लायक बनाता है।
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सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए कितने नंबर (Safe Score NEET UG 2026) चाहिए?
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अगर 213 नंबर पर सरकारी सीट नहीं मिलेगी, तो फिर कितने नंबर पर मिलेगी?
सरकारी मेडिकल कॉलेज पाना आज के समय में किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है। हालिया आंकड़ों और 2026 के रिजल्ट के हिसाब से जो सुरक्षित स्कोर (Safe Score) माना जा रहा है, वह कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग है:
जनरल (General) वर्ग
सरकारी एमबीबीएस (MBBS) सीट पाने के लिए आपको कम से कम 610 से 630 नंबर के पार जाना होगा। यह एक ऐसा सुरक्षित स्कोर है जहाँ आप उम्मीद कर सकते हैं कि आपको किसी न किसी राज्य में सरकारी सीट मिल जाएगी।
OBC वर्ग
जनरल के मुकाबले इसमें बहुत ज्यादा छूट नहीं मिलती। आपके लिए 590 से 610+ नंबर का लक्ष्य सुरक्षित माना जाएगा।
SC वर्ग
इस वर्ग के बच्चों को लगभग 520 से 550+ नंबर पर सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की बहुत अच्छी संभावना होती है।
ST वर्ग
एसटी वर्ग के लिए 490 से 550+ नंबर के बीच रहने पर सरकारी सीट आराम से मिल सकती है।
डेंटल (BDS) सीट -अगर आप एमबीबीएस की जगह डेंटल यानी दांतों का डॉक्टर बनना चाहते हैं और सरकारी सीट की तलाश में हैं, तो जनरल वर्ग के लिए लगभग 480 से ऊपर के नंबर सुरक्षित माने गए हैं।
NEET UG 2026 काउंसलिंग (Counseling) कैसे करानी चाहिए? (स्टेप-बाय-स्टेप)
“काउंसलिंग” यह शब्द सुनकर बहुत से लोग और माता-पिता घबरा जाते हैं। उन्हें लगता है कि पता नहीं वहां जाकर क्या करना होगा। लेकिन घबराइए मत, आजकल सब कुछ ऑनलाइन होता है। नीट की काउंसलिंग मुख्य रूप से दो अलग-अलग हिस्सों में बंटी होती है |
ऑल इंडिया कोटा (All India Quota – AIQ 15% सीटें)
पूरे देश में जितने भी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज हैं, उनकी 15% सीटों के लिए “NEET UG 2026” काउंसलिंग सीधे केंद्र सरकार की ‘मेडिकल काउंसलिंग कमेटी’ (MCC) करवाती है। इसमें कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक का कोई भी छात्र किसी भी राज्य के कॉलेज के लिए अप्लाई कर सकता है।
स्टेट कोटा (State Quota – 85% सीटें)
बाकी बची 85% सीटों के लिए आपके अपने राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी प्रक्रिया करवाती है। इसमें सिर्फ उसी राज्य के रहने वाले बच्चे (जिनके पास वहां का निवास प्रमाण पत्र है) हिस्सा ले सकते हैं।
काउंसलिंग कराते समय आपको इन बातों का बहुत खास ध्यान रखना चाहिए |
बहुत से बच्चे सिर्फ इसलिए काउंसलिंग से बाहर हो जाते हैं क्योंकि उनके पास सही समय पर कागज नहीं होते। अपनी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, नीट का एडमिट कार्ड, स्कोर कार्ड (रिजल्ट), आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र (Domicile), और जाति प्रमाण पत्र पहले से एक फाइल में सहेज कर रख लें।
काउंसलिंग का सबसे अहम और दिमागी हिस्सा यही है। इसमें आपको ऑनलाइन कंप्यूटर पर बताना होता है कि आप कौन सा कॉलेज चाहते हैं। अपनी पसंद के टॉप कॉलेज को हमेशा लिस्ट में सबसे ऊपर (नंबर 1 पर) रखें, भले ही आपको लगे कि आपके नंबर कम हैं। उसके बाद घटते क्रम में बाकी कॉलेज भरें।
चॉइस भरने के बाद उसे “लॉक” करना होता है। जब तक आप पूरी तरह श्योर न हो जाएं, फॉर्म को लॉक न करें।
काउंसलिंग एक दिन का खेल नहीं है। इसके कई राउंड होते हैं—जैसे राउंड 1, राउंड 2, मॉप-अप राउंड (Mop-Up Round) और स्ट्रे वैकेंसी राउंड (Stray Vacancy Round)। अगर पहले राउंड में आपको कोई कॉलेज न मिले, तो उदास होकर न बैठें, आगे के राउंड्स का शांति से इंतजार करें।
NEET UG 2026 में कम नंबर आने पर किस तरह का कॉलेज चुनना चाहिए?
यह वो सवाल है जो सबसे ज्यादा परिवारों को परेशान करता है—”बच्चा पास तो हो गया है, कट-ऑफ भी पार कर ली, लेकिन नंबर सिर्फ 250, 300 या 400 ही आए हैं, अब हम क्या करें?”
अगर आपके नंबर कम हैं, तो समझदारी इसी में है कि आप अपने विकल्पों (Options) को खुला रखें। कम नंबर वालों के लिए कुछ बेहतरीन रणनीतियां यहाँ दी गई हैं:
1. प्राइवेट या डीम्ड यूनिवर्सिटी (Private/Deemed Universities)
अगर आपके परिवार का बजट अच्छा है, तो आप सीधे प्राइवेट एमबीबीएस कॉलेजों की तरफ जा सकते हैं। प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन बहुत कम नंबरों पर भी हो जाता है, बस आपकी कट-ऑफ क्लियर होनी चाहिए (यानी जनरल के लिए 213+ नंबर)। आप ओपन राज्यों (जैसे यूपी, कर्नाटक) के प्राइवेट कॉलेजों में फॉर्म भर सकते हैं जहाँ दूसरे राज्य के बच्चे भी एडमिशन ले सकते हैं।
2. BDS (दांतों का डॉक्टर)
अगर आपको एमबीबीएस की सीट नहीं मिल रही है, लेकिन आप अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ लगाना चाहते हैं और मेडिकल फील्ड में ही बेहतरीन करियर बनाना चाहते हैं, तो BDS बहुत अच्छा विकल्प है। ऊपर मैंने बताया ही है कि इसका कट-ऑफ काफी कम जाता है।
3. BAMS, BHMS या BUMS (आयुष कोर्सेज)
आजकल दुनिया भर में आयुर्वेद (BAMS) और होम्योपैथी (BHMS) का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना के बाद से लोगों का भरोसा इन पर और गहरा हुआ है। अगर आपके नंबर 350 से 450 के बीच हैं, तो आपको अच्छे प्राइवेट या कुछ राज्यों में सेमी-गवर्नमेंट आयुष कॉलेज आराम से मिल सकते हैं। यह कम बजट में समाज की सेवा करने और डॉक्टर बनने का शानदार रास्ता है।
4. B.Sc Nursing या Veterinary (जानवरों के डॉक्टर)
जिनके नंबर बहुत ही कम हैं (जैसे 150 से 250 के बीच), उनके लिए B.Sc नर्सिंग या वेटरनरी साइंस बहुत ही सुरक्षित विकल्प हैं। आज के समय में अच्छे नर्सों की देश और विदेश दोनों जगह बहुत भारी डिमांड है और इसमें नौकरी लगने के चांस 100% होते हैं। नीट के स्कोर के जरिए ही कई अच्छे नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन मिल जाता है।
NEET UG 2026 किस मेडिकल कोर्स को करने में कितना पैसा (फीस) लगेगा?
अब आते हैं सबसे जरूरी और प्रैक्टिकल मुद्दे पर—पैसे पर। क्योंकि हम सब जानते हैं कि डॉक्टर बनने की पढ़ाई सस्ती नहीं होती। यहाँ मैं आपको सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों का एक अनुमानित खर्च बता रहा हूँ ताकि आप अपने परिवार के साथ बैठकर पहले से अपना बजट बना सकें:
1. MBBS (एमबीबीएस) की फीस
सरकारी कॉलेज: अगर आपके नंबर बहुत अच्छे हैं और आपको सरकारी कॉलेज मिल जाता है, तो समझ लीजिए कि आपका जीवन सेट हो गया। यहाँ पढ़ाई का खर्च बहुत कम होता है। सालाना फीस लगभग ₹10,000 से लेकर ₹1 लाख के बीच होती है। (अगर आपको दिल्ली का AIIMS मिल गया, तो वहां पूरे 5 साल के कोर्स की फीस सिर्फ 6-7 हजार रुपये ही होती है!)
प्राइवेट कॉलेज
यहाँ फीस बहुत ज्यादा होती है। एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS की फीस ₹10 लाख से लेकर ₹25 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है। यानी साढ़े चार साल के पूरे कोर्स और हॉस्टल के खर्च को मिला लें, तो आपका ₹50 लाख से लेकर ₹1 करोड़ रुपये तक का खर्च आराम से आ सकता है।
2. BDS (डेंटल कोर्स) की फीस
सरकारी कॉलेज
सरकारी डेंटल कॉलेज में फीस लगभग ₹20,000 से ₹50,000 रुपये सालाना के आसपास होती है।
प्राइवेट कॉलेज
प्राइवेट से दाँतों का डॉक्टर बनने में लगभग ₹2 लाख से ₹4 लाख रुपये सालाना खर्च होता है। पूरा कोर्स मोटे तौर पर ₹10 लाख से ₹20 लाख रुपये के बीच में पूरा हो जाता है।
3. BAMS (आयुर्वेद) और BHMS (होम्योपैथी) की फीस
सरकारी कॉलेज
इन आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कोर्सेज में भी सरकारी फीस बहुत कम, लगभग ₹15,000 से ₹40,000 रुपये सालाना के बीच होती है।
प्राइवेट कॉलेज
प्राइवेट कॉलेज से आयुर्वेद या होम्योपैथी करने में लगभग ₹1.5 लाख से ₹3 लाख रुपये सालाना का खर्च आता है।
4. B.Sc Nursing (नर्सिंग) की फीस
सरकारी कॉलेज
यहाँ फीस न के बराबर होती है, लगभग ₹5,000 से ₹15,000 रुपये सालाना। कई जगह तो सरकार लड़कियों को स्कॉलरशिप भी देती है।
प्राइवेट कॉलेज
प्राइवेट कॉलेज से नर्सिंग करने में ₹70,000 से ₹1.5 लाख रुपये सालाना तक लग सकते हैं।
(ऊपर बताई गई फीस एक सामान्य अनुमान है। अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग कॉलेजों के हिसाब से यह थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकती है।)
निष्कर्ष (Conclusion NEET UG 2026)
अंत में मैं आपसे बस इतना ही कहना चाहूँगा कि NEET UG 2026 में अगर आपके नंबर बहुत अच्छे आए हैं, तो आपको और आपके परिवार को ढेरों बधाइयाँ! लेकिन, अगर किसी वजह से आपके नंबर थोड़े कम भी रह गए हैं, तो बिल्कुल भी निराश या हताश न हों।
जिंदगी सिर्फ एक एमबीबीएस (MBBS) की सीट पर आकर खत्म नहीं हो जाती। आपके सामने प्राइवेट कॉलेज, डेंटल (BDS), आयुर्वेद (BAMS), होम्योपैथी और नर्सिंग जैसे कई शानदार और सम्मानजनक रास्ते खुले हैं। सही जानकारी रखें, सूझ-बूझ से काम लें और ठंडे दिमाग से अपनी काउंसलिंग करवाएं। अपने बजट और अपने शौक को ध्यान में रखते हुए किसी अच्छे कॉलेज का चुनाव करें।
क्या आपके मन में NEET UG 2026 की काउंसलिंग, कम नंबर पर एडमिशन या किसी खास कॉलेज की फीस को लेकर कोई और सवाल है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर बेझिझक पूछें, हम आपके हर सवाल का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे! अगर यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

