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होम्योपैथी दवा (Homeopathy Medicine) कैसे काम करती है? क्या हमें इसे लेना चाहिए या नहीं?

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Homeopathy Medicine Works in Hindi – हम जब भी बीमार पड़ते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल आता है—डॉक्टर के पास जाने का| लेकिन डॉक्टर के पास जाने से पहले भी एक सवाल आता है कि कौन सी दवा लें? अंग्रेजी दवा (एलोपैथी), आयुर्वेद या फिर होम्योपैथी की वो छोटी-छोटी मीठी गोलियां?

बचपन में हम सबने वो सफेद रंग की मीठी-मीठी गोलियां जरूर खाई होंगी| कई बार तो बीमारी न होने पर भी बच्चे उन्हें टॉफी समझकर खा जाते हैं| लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी छोटी और मीठी गोलियां आख़िर बड़े से बड़े रोग को कैसे ठीक कर देती हैं? क्या इनके पीछे कोई जादू है या पूरा विज्ञान?

आज इस लेख में हम बिल्कुल अपनी देसी और बोलचाल की भाषा में समझेंगे कि Homeopathy Medicine किस तरह से काम करती है और हमें इसे लेना चाहिए या नहीं| अगर आपके मन में भी होम्योपैथी को लेकर कोई शक या सवाल है, तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपके सारे डाउट बिल्कुल साफ हो जाएंगे|

Homeopathy Medicine Works in Hindi – क्या होम्योपैथी दवा सच

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि इसकी शुरुआत कहाँ से हुई| Homeopathy Medicine कोई नया तरीका नहीं है, यह करीब 200 साल से भी ज्यादा पुराना है| इसकी खोज जर्मनी के एक डॉक्टर क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन ने की थी|

मजेदार बात यह है कि वह खुद एक एलोपैथिक (अंग्रेजी) डॉक्टर थे, लेकिन वह उस समय की अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट्स से परेशान आ चुके थे| वह कुछ ऐसा खोजना चाहते थे जो बीमारी को बिना किसी तकलीफ के, बिल्कुल शांत तरीके से जड़ से खत्म कर दे| इसी खोज में से जन्म हुआ होम्योपैथी का|

होम्योपैथी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—’होमियो’ यानी एक जैसा और ‘पैथी’ यानी बीमारी या तकलीफ| इसका पूरा सिद्धांत एक बुनियादी नियम पर टिका है “लोहा ही लोहे को काटता है” |

Homeopathy Medicine किस तरह से काम करती है?

अब आते हैं आपके सबसे बड़े सवाल पर कि यह काम कैसे करती है? अंग्रेजी दवाएं तो कड़वी होती हैं, उनका कैप्सूल होता है, सिरप होता है, जो पेट में जाकर तुरंत असर दिखाता है| पर ये मीठी गोलियां शरीर में क्या करती हैं?

इसको समझने के लिए हमें होम्योपैथी के काम करने के 3 बड़े तरीकों को समझना होगा:

Homeopathy Medicine का मानना है कि जो चीज किसी स्वस्थ इंसान को बीमार कर सकती है, वही चीज किसी बीमार इंसान को ठीक भी कर सकती है|

जब आप प्याज काटते हैं, तो क्या होता है? आपकी आँखों से पानी आता है, नाक बहने लगती है और जलन होती है| ये सारे लक्षण बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे किसी को सर्दी-जुकाम या एलर्जी होने पर होते हैं|

अब Homeopathy Medicine विज्ञान क्या करेगा? वह प्याज के रस से ही एक दवा तैयार करेगा (जिसे Allium Cepa कहते हैं)| जब यह दवा किसी सर्दी के मरीज को दी जाएगी, तो उसका जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा| है ना कमाल की बात! यानी जिससे बीमारी के लक्षण पैदा हो रहे हैं, उसी को बहुत ही सूक्ष्म (Micro) मात्रा में देकर बीमारी को काटा जाता है|

अब आप सोचेंगे कि अगर जहर या किसी नुकसानदेह चीज से ही दवा बनानी है, तो वह शरीर को नुकसान क्यों नहीं पहुंचाती?

यहीं पर आता है होम्योपैथी का असली जादू, जिसे पोटेंटाइजेशन कहते हैं| इसमें मूल चीज (जैसे किसी पौधे का रस या खनिज) को लिया जाता है और उसे पानी या अल्कोहल के साथ बार-बार मिलाया और हिलाया जाता है| इसे इतना पतला (Dilute) कर दिया जाता है कि उस मूल चीज का बुरा असर बिल्कुल खत्म हो जाता है, लेकिन उसकी ‘याद’ या ‘ऊर्जा’ (Energy) उस पानी में रह जाती है| इसके बाद उस पानी की बूंदों को सादे साबूदाने जैसी दिखने वाली उन मीठी गोलियों पर डाला जाता है|

अंग्रेजी दवाएं क्या करती हैं? अगर आपको दर्द है, तो वह दर्द के सिग्नल को ब्लॉक कर देंगी| अगर आपको इन्फेक्शन है, तो वह बैक्टीरिया को मार देंगी| लेकिन होम्योपैथी ऐसा नहीं करती|

होम्योपैथी का मानना है कि हमारे शरीर के अंदर एक “वाइटल फोर्स” (Vital Force) यानी जीवन शक्ति होती है, जिसे हम आज की भाषा में इम्युनिटी कहते हैं| जब यह शक्ति कमजोर पड़ती है, तभी हम बीमार होते हैं| होम्योपैथी की मीठी गोली आपके शरीर के अंदर जाकर उसी सोई हुई जीवन शक्ति को जगाती है| दवा शरीर से कहती है—”उठो और इस बीमारी से खुद लड़ो!” जब आपकी अंदर की ताकत जाग जाती है, तो शरीर बीमारी को खुद-ब-खुद बाहर फेंक देता है|

होम्योपैथी दवा लेने का सही तरीका क्या है?

कई लोग कहते हैं कि “हमने होम्योपैथी दवा तो ली, पर कोई फायदा नहीं हुआ|” अक्सर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम इसे लेने में कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं| इस दवा को लेने के कुछ खास नियम होते हैं |

Homeopathy Medicine गोलियों को कभी भी हाथ की हथेली पर रखकर नहीं खाना चाहिए| दवा की शीशी के ढक्कन में ही गोलियां निकालें और सीधे जीभ पर डाल लें| हाथों की गंदगी या पसीने से दवा का असर कम हो सकता है|

इन गोलियों को पानी के साथ निगलना नहीं होता| इन्हें जीभ पर रखकर चूसना होता है| हमारी जीभ के नीचे बहुत सारी नसें होती हैं, जो दवा के असर को तुरंत सीधे हमारे नर्वस सिस्टम तक पहुंचा देती हैं|

दवा खाने के कम से कम 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ भी न खाएं-पीएं| यहाँ तक कि पानी भी न पीएं|

जब आपकी Homeopathy Medicine चल रही हो, तो कच्चा प्याज, लहसुन, हींग, कॉफी, या पुदीना जैसी तेज गंध वाली चीजों से थोड़ी दूरी बना लें| इनकी तेज खुशबू दवा के असर को काट सकती है|

होम्योपैथी दवा लेना चाहिए या नहीं?

चाय की दुकान से लेकर इंटरनेट के फोरम तक, इस बात पर हमेशा बहस चलती है कि होम्योपैथी दवा लेनी चाहिए या नहीं| कुछ लोग इसे अंधविश्वास या सिर्फ ‘प्लेसबो इफेक्ट’ (मन का वहम) मानते हैं, तो कुछ लोग इसके मुरीद हैं|

आइए बिना किसी पक्षपात के, इसके फायदे और नुकसान दोनों को देखते हैं ताकि आप खुद तय कर सकें|

होम्योपैथी दवा लेने के बड़े फायदे (Pros)

यह इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है| अंग्रेजी दवाओं की तरह इसे खाने से पेट में जलन, लिवर पर दबाव या किडनी की समस्या नहीं होती| यह इतनी सुरक्षित है कि नवजात बच्चे से लेकर गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग भी इसे आराम से ले सकते हैं|

एलोपैथी अक्सर लक्षणों को दबाती है (जैसे बुखार आया तो पैरासिटामोल दे दी)| लेकिन होम्योपैथी यह देखती है कि बुखार आया क्यों? यह बीमारी के मूल कारण पर वार करती है, इसलिए इसमें थोड़ा समय जरूर लगता है, पर बीमारी अमूमन हमेशा के लिए चली जाती है|

मान लीजिए तीन लोगों को सिरदर्द है| अंग्रेजी डॉक्टर तीनों को एक ही पेनकिलर दे सकता है| लेकिन होम्योपैथी डॉक्टर तीनों से अलग-अलग सवाल पूछेगा—”सिरदर्द किस तरफ है? सुबह होता है या शाम को? गुस्सा आने पर बढ़ता है या धूप में?” इसके बाद तीनों को बिल्कुल अलग-अलग दवा दी जाएगी| यानी यहाँ मरीज के स्वभाव और शरीर के हिसाब से इलाज होता है|

यह दवाएं जेब पर भारी नहीं पड़तीं और खाने में मीठी होने के कारण बच्चे इन्हें बिना किसी नखरे के आसानी से खा लेते हैं|

ये भी पढ़ें – HMPV Respiratory Virus क्या है और इनके बचाव को जानिए

होम्योपैथी की कुछ सीमाएं (Cons)

अगर आप सोचें कि अभी गोली खाई और आधे घंटे में दर्द गायब, तो ऐसा Homeopathy Medicine में आमतौर पर नहीं होता| यह धीरे-धीरे काम करती है| पुरानी बीमारियों (जैसे अस्थमा, स्किन प्रॉब्लम) को ठीक होने में महीनों लग सकते हैं|

अगर खुदा न खास्ता किसी का एक्सीडेंट हो जाए, हार्ट अटैक आ जाए, या बहुत तेज खून बह रहा हो, तो ऐसी स्थिति में होम्योपैथी के भरोसे नहीं बैठा जा सकता| वहां तुरंत अंग्रेजी दवा और सर्जरी (Emergency Care) की ही जरूरत होती है|

इसे और अच्छे से समझने के लिए नीचे दी गई टेबल को देखें |

विशेषता (Feature)एलोपैथी (अंग्रेजी दवा)होम्योपैथी (मीठी गोली)
असर की रफ्तारबहुत तेज (तुरंत राहत)धीमी और क्रमिक (धीरे-धीरे असर)
काम करने का तरीकाबीमारी के लक्षणों को दबाना या कीटाणुओं को मारनाशरीर की खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता को जगाना
साइड इफेक्ट्सहाँ, लंबे समय तक लेने पर हो सकते हैंना के बराबर, पूरी तरह सुरक्षित
इलाज का आधारबीमारी का नाम (जैसे- डायबिटीज, बीपी)मरीज का स्वभाव, लक्षण और मानसिक स्थिति
आपातकालीन स्थिति (Emergency)सबसे बेस्ट और लाइफ-सेविंगरिकवरी के लिए अच्छी, पर इमरजेंसी में काम नहीं आती

हमारा अंतिम फैसला – कब लें और कब न लें?

अगर हम बिल्कुल साफ शब्दों में बात करें, तो होम्योपैथी कोई जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन यह एक बहुत ही कारगर और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है|

आपको Homeopathy Medicine कब चुननी चाहिए?

अगर आपको ऐसी बीमारियां हैं जो लंबे समय से आपका पीछा नहीं छोड़ रहीं—जैसे कि स्किन की कोई एलर्जी, सोरायसिस, गैस-एसिडिटी की पुरानी समस्या, गठिया (Arthritis), माइग्रेन, साइनस, या बार-बार होने वाला सर्दी-जुकाम| इन मामलों में Homeopathy Medicine सबसे बेहतरीन काम करती है|

बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने और उन्हें बार-बार होने वाले इन्फेक्शन से बचाने के लिए यह बहुत ही सुरक्षित और असरदार है|

अगर आप भारी-भरकम एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स खाकर थक चुके हैं और उनके साइड इफेक्ट्स से बचना चाहते हैं, तो आपको जरूर होम्योपैथी की तरफ रुख करना चाहिए|

आपको होम्योपैथी कब नहीं चुननी चाहिए?

जब मामला अचानक आई किसी बड़ी मुसीबत का हो, जैसे—हड्डी टूटना, अपेंडिक्स का दर्द, भारी इन्फेक्शन जिसमें तुरंत एंटीबायोटिक की जरूरत हो, या कोई सर्जिकल केस| ऐसी स्थिति में सीधे मॉडर्न मेडिसिन (एलोपैथी) के पास जाएं|

निष्कर्ष (Conclusion Homeopathy Medicine)

चलते-चलते बस इतना ही कहेंगे कि सेहत आपकी है, इसलिए फैसला भी समझदारी से लेना चाहिए| “Homeopathy Medicine” पर यह आरोप लगाना कि यह सिर्फ ‘वहम’ है, बिल्कुल गलत होगा| दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे ठीक हो रहे हैं| यह दवा शरीर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए, चुपचाप अपना काम करती है|

बस एक बात का हमेशा ध्यान रखें—कभी भी खुद से डॉक्टर न बनें| यूट्यूब पर वीडियो देखकर या किसी दोस्त के कहने पर होम्योपैथी की शीशी खरीदकर खुद से दवा न खाने लगें| हमेशा किसी अच्छे और सर्टिफाइड BHMS डॉक्टर के पास जाएं, उन्हें अपनी पूरी बात खुलकर बताएं, और फिर उनके निर्देशानुसार इलाज शुरू करें| संयम (Patience) रखें, क्योंकि अच्छी चीजें थोड़ा वक्त लेती हैं |

तो दोस्तों, क्या आपने कभी किसी बीमारी के लिए Homeopathy Medicine आजमाई है? आपका अनुभव कैसा रहा, हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं| अगर यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें |

Abhishek Kumar
Abhishek Kumarhttps://websitehindi.com
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