sauch swachchta

खुले में सौच मुक्त और स्वच्छता का मिशाल बनी भगजोगनी |

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सौच मुक्त और स्वच्छता
खुले में सौच मुक्त और स्वच्छता का मिशाल बनी भगजोगनी | ( hindi kahani ) »  यह     कहानी   भगजोगनी   का  है | जो सौच मुक्त और स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए किस तरह गाँव की आदर्श   लाडली बनी | इस लेख को जरुर पढ़िए |

sauch swachchta
सौच मुक्त और स्वच्छता :- गाँव गवई में   होनी से अनहोनी कर दिखाना तथा समर्थो के बिच असमर्थ लड़की द्वारा किया कार्य , प्ररेणा बन कर उभरा |
आज से 10 साल पहले रामनाथ नाई की किडनी की गड़बड़ी के वजह से देहांत हो चूका था |
वे अपने पीछे पत्नी शिला और छ: साल की बच्ची एवं चार साल का बचा छोड़कर चल बसे |
मात्र पंद्रह कठ्ठा जमीन भरण पोषण के लिए था |
उन जमीनों के द्वारा अपना कार्य पत्नी चलती थी | एक दुसरे के गॉव में कार्य मिलता तो करती लेकिन देहात में काम मिलने का अभाव था |

सौच मुक्त और स्वच्छता

बड़ी लड़की सोलह साल की अवस्था में पहुँच गयी थी |
नौवी क्लास की छात्रा थी | भाई विकाश अभी सात क्लास में पढता था |
लड़की का नाम भगजोगनी था | भगजोगनी सुबह स्कूल जाने से पहले छोटे बच्चो को ट्यूशन पढ़ाती थी |
जिसमे बीस – तिस बचे तिन – चार बैच में पढ़ते थे |
                                  इसी क्रम में खुले में सौच मुक्त का अभियान तेज था |
गाँव में स्वच्छता के लिए निगरानी समिति का गठन हुआ था |
रोड गली खुले में सौच के लिए कड़ी निगरानी पहडा बैठा था |
तथा पांच सौ जुरमाना का प्रचार – प्रसार जोड़ – सोर से चल रहा था |
रोज दो – चार आदमी पकड़ कर ले जाया जाता था |
सरकार का ऐलान था की पहले सौचालय तैयार करो बाद में उसका अनुदान खाता पर दिया जायेगा |
एक दिन भगजोगनी की माँ शिला सोंच में डूबी थी कि घर में पैसा नही है | कैसे सौचालय बनवाऊ अभियान तेज है | रोज  सौच मुक्त और स्वच्छता के लिए धर पकड़ चल  रहा है |   भागम – भाग की जिंदगी   कैसे कटेगी | भगजोगनी और विकाश का पढाई   लिखाई भी करनी थी | लेकिन ट्यूशन पढ़कर माँ का साथ बड़ी बेटी भगजोगनी हाथ बटा राखी थी | भगजोगनी बोली माँ चिंता मत करो सब ठीक हो जायेगा |
भगजोगनी सुबह उठी और गाँव के सटे नहर पर टोकरी और कुदाल लेकर चली गयी | नहर का बांध टूटने से पानी नही बल्कि सुखा पड़ा था |
केवल बालू और रेत दिखाई दे रहा था | भगजोगनी ने बहुत सारे बालू घर लेकर आई |
जमीन की खुदाई स्वयं करने लगी | माँ और भाई ने भी साथ दिया |
घर का टुटा हुआ कुछ टुकड़ा को इकठ्ठा कर दी |
माँ से बोली कुछ सीमेंट का उपाय करो | मै स्वयं सौचालय बनाउंगी |
भगजोगनी पढ़ लिखकर आती और सौचालय के ईट जोड़ने में लग जाती |इसी तरह दस – पंद्रह दिनों में बिना कारीगर के सौचालय बनकर तैयार कर दी |
गाँव में भगजोगनी का चर्चा होने लगा | निगरानी समिति की दृष्टि भगजोगनी के ऊपर गया |
इसके बाद सौच मुक्त और स्वच्छता के लिए पंचायत , प्रखंड और जिला स्तर पर समानित की गयी | ( hindi kahani )
(लेखक – दरोगा सिंह )

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