dashhra durga puja

दुर्गा पूजा त्यौहार

परिचय

दुर्गा पूजा हिन्दुओ का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है |दुर्गा पूजा को दशहरा के नाम से भी पुकारा जाता है | यह त्यौहार सभी त्योहारों में से एक है | यह कहा जाता है की दुर्गा पूजा को हिन्दू लोग एक साल में चैत्र और अशिवन के महिना में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है | दुर्गा पूजा को दस दिनों तक मनाया जाता है | इस त्यौहार में सफल होने के लिए लोग नौ दिन तक उपवास रखते है |

durga puja

दुशहरा के दस दिनों में से छ : दिनों को महालय , महा सप्तमी , महा अष्टमी , महा नवमी , तथा दसवे वाले दिन को विजयादशमी के नाम से मनाया जाता है | दुर्गा पूजा में नौ दिनों तक उपवास रखने से बुराई से दूर होकर विजय की प्राप्ति होता है | दुशहरा के दशवे दिन दुर्गा माँ का विसर्जन किया जाता है |

दुर्गा पूजा का महत्व

दुर्गा पूजा का समय आने पर चारो ओर ख़ुशी का रंग खिल उठता है | इसी समय पुरे दुशहरा के पहिला दिन से दशवे दिन बड़ी धूमधाम से पूजा अर्चना किया जाता है | हमारा देश मातृभक्त देश होने के कारन दुर्गा माँ का पूजा को महत्व दिया जाता है | यहाँ तक की देवी और देवता भी देवी माँ को मानते है |
आसपास सभी मंदिरों में बड़ी धूमधाम से पूजा पाठ करते है | इसके साथ अलग – अलग स्थानों पर पंडाल और सजावट से सजाया जाता है | लोग तरह – तरह का पंडाल डिजायन लगते है | कुछ भक्त तो देवी माँ के नौ दिन उपवास रखते है | इसी दिन देवी माँ ने नौ दिन लड़ाई करके महिसासुर का अंत की थी | तभी से देवी माँ का पूजा पाठ धूमधाम से होने लगा |

अलग – अलग अस्थानो पर देवी माँ का त्यौहार

हमारे देश में अलग –अलग राज्यों में अलग अलग तरीको से दुर्गा पूजा मनाया जाता है | बिहार , बंगाल , कलकाता , महराष्ट्र , गुजरात , दिल्ली इस सभी जगहों पर अलग ही किस्मो से माँ के पर्व को मनाया जाता है | महराष्ट्र और गुजरात में डंडिया का आनंद बड़ी चाव से लिया जाता है | कलकाता में भी डंडिया और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद भक्ति गीतों से लिया जाता है |
इन सभी स्थानों में से बिहार कम नही है | बिहार में भोजपुरी और हिंदी गीतों पर लोग बड़ी उल्लास के साथ माँ दुर्गा का त्यौहार मानते है |

दुशहरा में धूमधाम

जब दशहरा का समय आते है तो चारो ओर त्यौहार मानाने का होड़ लग जाता है | लोग दुर्गा माँ को दिल से पूजा पाठ करते है | चारो ओर पंडाल और सजावट से सजा रहता है | जुगनू , लाइट , देकोरेसन , सभी चीज का व्य्वश्था किया जाता है | कहीं कहीं तो खाने पिने का कार्यकर्म चलता रहता है |
अलग – अलग जगहों पर पुराणी परम्परा के अनुसार नाटक , संगीत , सांस्कृतिक कार्यकर्म का आयोजन किया जाता है | लोग देवी माँ का भक्तिमय गीत बजाते और नाचते है |

विसर्जन

दुर्गा पूजा त्यौहार नौ दिनों तक मानाने के बाद दशवे दिन मूर्ति विसर्जन का दिन होता है | लोग देवी माँ के मूर्ति को नदी , तलब , नहर , पानी में माँ के मूर्ति को विसर्जन करते है |  दशवे दिन साउंड बॉक्स में माँ देवी का गीत बजाते हुए लोग विसर्जन करते है |
आजकल और धूम मचने के लिए अंग्रेजी बाजा का आनंद लेते है | अंग्रेजी बाजा में माँ देवी के गीतों का धुन गूंजता है तो चारो ओर सभी के मन में भक्ति का असर दिखाई देने लगता है | विसर्जन के दिन लोग माँ के प्रसाद का सेवन करके सभी दुखो को नष्ट करके सुख का अनुभव करते है |

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