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डेयरी फार्मिंग करने से पहले जानिए देसी – बिदेसी गाय का नस्ल

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Deyri farming करने से पहले कुछ बातो पर ध्यान देना आवश्यक होता हैं । नहीं तो आपका बिज़नेस सक्सेस नहीं हो पायेगा । डेयरी फार्मिंग करने से पहले गाय , भैस के बारे में जानकारी रखना जरुरी होता हैं । जो लोग रूचि के बिना कोई काम करते हैं । तो 95% लोग असफल हो जाते है ।

Deyri farming

किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने मंजिल के बारे में फूल जानकारी होना बहुत जरुरी हैं । इसी को देखते हुए मैं इस पोस्ट में बताऊंगा । डेयरी फार्मिंग करने से पहले गाय , भैस के बारे में कुछ जरुरी बाते शेयर करूँगा । पालतू जानवर के बारे में जान लेना चाहिए की जानवर किस नस्ल के हैं । यह जानवर किस स्थान पर पायाजाता हैं । गाय कितना दुग्ध देती है । गाय चारा क्या खाती है ।
यहाँ तक की मवेशी बीमार पड़ने पर इलाज करने के लिए कुछ जानकारी होना चाहिए । ऐसा नहीं करने पर आपका बिजनेस बर्बाद हो सकता हैं । डेयरी फार्मिंग में कामयाब होने का कुछ बाते बता रहा हूँ । continue रीड करें ।

Deyri farming देसी गाय का नस्ल पहचाने ।

आधार कार्ड में सुधार ऑफलाइन पोस्ट के दवारा कैसे करे
क्रेडिट कार्ड ऑनलाइन अप्लाई कैसे करे । फुल इनफार्मेशन
पहचान पात्र ऑनलाइन अप्लाई करे
एडसेंस अकाउंट में एड्रेस वेरीफाई कैसे करे

आप्शन 1

दुग्ध उत्पादन का में भारत का स्थान पहला है । तथा 140 टन मीलियन वार्षिक दूध का उत्पादन भारत में किया जाता हैं । सरकार ने दुग्ध उत्पादन पर बिशेष ध्यान देती हैं । सरकार का लक्ष्य है । 2020 तक 200 टन दुग्ध का उत्पादन करना ।
Deyri farming
अच्छे नश्ल का गाय खरीदकर अधिक दुग्ध का उत्पादन किया जा सकता हैं ।

आप्शन 2

अगर आपको अधिक से अधिक दूध देनेवाली गाय की आवश्यकता हैं । तो नस्ल पहचान कर ख़रीदे ।
1.  गिर :- गिर प्रजाति के गाय गिर के जंगलो में पायी जाती हैं । इस प्रकार की गाय सफ़ेद धब्बों से युक्त होती हैं । तथा शरीर से भारी और बड़ा अकार की होती हैं । सर और कान लंबे होते हैं । पूछ गुछेवाली लंबी सी होती है । इस प्रकार की गाय 1200 से 2800 लीटर प्रति बियांन दुग्ध देती हैं ।
2.  रेड सिंधी :- इस प्रकर की गाय सिंध प्रान्त के गुजरात, उतर प्रदेस, बिहार, राजस्थान , हरियाणा ,में पायी जाती हैं । यह गाय लाल, डार्क, और गहरा रंग की होती हैं । तथा इनके शरीर माध्यम आकार के होते हैं । इनके माथे पर सफ़ेद धब्बे होते हैं । इनके मजबूत सिंग और लटकता हुआ गलकम्बल होते हैं । यह 680 से 2270 लीटर तक दुग्ध करती हैं ।
3.  बछौर :- यह सीतामढ़ी जिले में पायी जानेवाली गाय हैं । इस गाय का पीठ गर्दन छोटे व ललाट , मशाल चावड़ा होते हैं । यह शरीर से गठीला होती हैं । यह दुध बहुत कम करती हैं ।
4.  शाहीवाल :- यह नजदीक में बिहार, राजस्थान , गुजरात, पंजाब में पायी जाती है । इसका सर लंबा होते हैं । सिंग मोटे और छोटे होते और हल्का रंग लाल होते हैं । यह 1134 से 3175 लीटर दूध प्रति बियांन देती है  ।
5.  हरियाणा :- यह हरियाणा और दिल्ली के आसपास पायी जाती हैं । इसका आकार लंबा होती हैं । इसकी त्वचा सफ़ेद रंग की पतली और मुलायम होती हैं । इस नस्ल का कुल उत्पादन 635 से 1497 लीटर प्रति बियांन होती हैं ।
6.  थारपारकर :- यह राजस्थान में पायी जाती हैं । इसका सिंग माध्यम तथा सर चावड़ा होती है। । यह 680 से 2268 लीटर दूध देती हैं ।
7.  गंगातिरी और शाहवादि :- यह उत्तर प्रदेश के बलिया जिला और बिहार के सारण जिले में पायी जाती हैं । इनका शरीर सफ़ेद रंग के माध्यम आकार के होते हैं ।
इस प्रकार गाय का नस्ल के बारे में  पता लगाया जा सकता हैं ।

बिदेशी नश्ल

1.  जर्सी :- यह जर्सी प्रान्त इंग्लॅण्ड में पायी जाती हैं । इसकी सर कन्धा तथा पीठ एक लाइन में होती हैं । इसका रंग भूरा, हल्का लाल व बादामी होती हैं । और यह दूध लगभग 4590 लीटर दूध करती हैं ।
2.  हॉस्टिंन फ्रीजियन :- यह हालैंड में पायी जाती हैं । इस गाय का रंग सफेद व काला होती है ।
मुझे उमीद है । की Deyri farming  से रिलेटेड पोस्ट बढ़िया लगा होगा । दोस्तों को जानकारी होने के लिए सोशल मिडिया पर शेयर करे ।

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