Deled course 502 assignment

Deled course 502 assignment 1 question 1 with answer

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Deled course 502 assignment 1 question 1 with answer »
इस लेख में अवलोक्नाम्तक अधिगम के चार प्रक्रिया के बारे में असाइनमेंट  1 के पहला प्रश्न का उत्तर जानेंगे |

पिछले पोस्ट में हमने कोर्स 501 का पूरा question का answer पब्लिश कर दिया है |
अगर आपने अभी तक उसका answer नही जानते है तो इस पोस्ट में लिंक
add कर दिया जायेगा | आप link पर क्लिक करके पढ़ व लिख सकते है |

Deled course 502 assignment

इस पोस्ट में Deled course 502 assignment 1 का पहला उत्तर लिख रहा हूँ | जो आपके   लिए हेल्पफुल हो सकता है |
याद रहे इसे हमने डी.एल.एड के पीडीऍफ़ फाइल से और खुद के सोंचने व ज्ञान के द्वारा लिखा हूँ | हो सकता    है |
आप कुछ और सोचते हो | अगर आपको लगता है | की question के उत्तर में कुछ बदलाव करन चाहिए |
तो कर सकते है | या खुद से लिखकर असाइनमेंट बना सकते    है |

⇒ Deled course 502 assignment 1 question 2 with answer

Deled course 502 assignment 1

Q. 1 ) अवलोक्नाम्तक अधिगम की चारों प्रक्रियाओ की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए
अवलोकनीय अधिगम में अनुकरण किस प्रकार सहायक है |
उत्तर :-  हम जानते है | अधिगम बच्चे या मानव की सोचने और समझने का एक महत्वपूर्ण शब्द है | अवलोकन से अधिगम मानव अधिगम की सामान्य और प्राकृतिक विधि है | अवलोक्नाम्तक अधिगम को अनेक नाम से जाना जाता है | जैसे – सामाजिक अधिगम आदर्शात्मक अधिगम , स्थानापन अधिगम | अवलोक्नाम्त्क अधिगम बच्चो के लिए एक महत्वपूर्ण अधिगम विधि है | जो दूसरो के द्वारा किये गए व्यवहार देखने अपनाने व परखने से ग्रहण किया जाता है | जब बच्चा मौलिक क्रिया कलाप में होता है | जैसे भाषा और प्राकृतिक सिधान्तो को ग्रहण करता है | लेकिन यह अनुकरण से अलग है |
अवलोक्नाम्त्क अधिगम की चार क्रियाये इस प्रकार है |
1.  ध्यान प्रक्रिया :- हम जानते है जब कोई बच्चा सिखने के लिए किसी विन्दु पर ध्यान देता है | या यूँ कहे की आदर्श की पुरे व्यवहार की नक़ल नही करते , बल्कि केवल व्यवहार के पहलुओ पर ध्यानं केन्द्रित करते है | जो सिखाने में हमे अच्चा लगता है | हम व्यवहार के उन्ही महत्वपूर्ण लक्षणों की ओर ध्यान देते है | जो हम सीखना चाहते है |
उदाहरण :  एक बच्चा अच्चा सुलेख लिखने के लिए अध्यापक / शिक्षाक को ध्यान पूर्वक देखता है | और बारीकी से उसके पेंसिल पकड़ने के तरीके पर ध्यानं केन्द्रित करता है | वह कैसे अपनी अंगुलियाँ घुमती है | कहाँ पर वह बड़े अक्षरों का प्रयोग करती है |  अत : उसका ध्यान अध्यापक के पहनावे पर एवं चलने के तरीके पर नही जाता |
2.  स्मृति की प्रक्रिया :- सुचना को दिमाग ने एकत्रित करने की योग्यता भी अधिगम प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भाग है | स्मृति को कई प्रकार के कारन से प्रभावित कर सकते है | एकत्रित सूचनाओ को बाद में प्रयोग में लाना और उस पर अमल करना अवलोकन अधिगम का महत्वपूर्ण अंग है | हमे अवलोकन की गयी वस्तुओ को कुच्छ चिन्हों के प्रयोग के तरीके के द्वारा , समझ के द्वारा और उनका संगठन करके याद रखने की संभावना है | उदहारण : यदि कोई लता मंगेशकर की तरह गीत गाने की प्रयाश कर रही है | तो शुरू में उसके मन में लता के आवाज की तरह कल्पना लता के व्यक्तिगत रूप से गेट हुए देखकर या टी वी पर देखने के बाद करनी होगी |
3.  पुन : निर्माण की गतिक प्रक्रिया :-  हम जानते है द्रिश्यकृति के अभ्यासं के द्वारा अवलोकन यवहार के समरण के बाद शारीरिक कार्य के रूप में बदल जाता है | इसके लिए दो चीजो की आवश्यकता होती है | उदहारण : यदि कोई सचिन तेंदुलकर की तरह बलेबाज बन्ने की इच्छा रखता है तो बल्लेबाज बन्ने के लिए उसे शारीरिक क्षमता का होना आवश्यक है | यदि वह कमजोर है तो जरुरी नही की सचिन तेंदुलकर जैसा बन सके | इसके लिए बल्ले को उठाना और सचिन तेंदुलकर की तरह घुमाना बहुत कठिन कार्य होगा |
4.  प्रेरक प्रक्रिया :- जब कोई बच्चा दुसरे के कार्य को देखकर अच्छी तरह सिख लेता है | और सिखने के बाद सभी बातो को बता भी देता है | इस कार्य को अच्छी प्रकार कर लेता है | लेकिन आवश्यकता होने पर वही कार्य करने के लिए कहा जाए तो नही कर पते है | उदाहरण : मेरा एक दोस्त है | वह किसी के कार्य को देखकर सिख लेता है | लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उसे याद नही रहता | ऐसी परस्थितियो में समुचित प्रेरणा का अभाव है | बच्चे को प्रेरित करने की आवश्यकता होती है |
उपयुक्त ऊपर चार प्रक्रियाये जानने के बाद हम कह सकते है की अवलोकनीय अधिगम में अनुकरण एक दुसरे के प्रति सहायक होते है | जब भी किसी व्यक्ति को सीखना होता है तो अनुकरण के व्यवहार से और किसी क्रिया से सीखते और समझते है | जिसे यूँ कहें कीजिसमे अवलोकन करता आदर्श की व्यवहार की नक़ल करता है | यही नही उसका पुन : निर्माण करता है | इसीलिए अवलोकन के माध्यम से अधिगम किसी आदर्श के व्यवहार का पूर्ण रूप से पुन निर्माण नही है | लेकिन अवलोकन किये गए व्यवहार के आधार पर  नए व्यवहार का विकाश है | जो अपने व्यवहार और क्रियाओ से आकर्षित करता है | वह व्यक्ति अनुकरण करने के लिए आदर्श बन जाता है |

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Deled course 502 assignment 1 question 2 with answer

18 thoughts on “Deled course 502 assignment 1 question 1 with answer”

  1. sir mujhe d.el.ed se aapni payment return leni he mene nios and account depatment me mail kiya he par waha se koi responce nahi mil raha he so sujhav digiye. mene allrady b.ed kiya he.

  2. RAJESH KUMAR PAL ,FATHER NAME CHHEDI LAL , SCHOOL SHRI SANJAY GANDHI P.M.V. HANNA VINAIKA , DISTIC CHITRAKOOT U.P. SIR MERA DELED LIST ME NAM DEKHANA HAI. REFRENCE NU. D094101040

  3. sir abhi tak mayny kuch bhi nahi kiya hi kaya roll aa jay ga studsy centr kaha per ho gakuch bhi pata nahi chal raha hai on line studsy karna bhut hi muskel hai

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