Bhagwan Hanuman: भगवान हनुमान जी का परिचय हिंदी !

Last updated on May 9th, 2024 at 12:18 pm

Bhagwan Hanuman: भगवन हनुमान की हिन्दू धर्म में पूजा की जाती है, जो रामायण से लेकर आजतक भगवन हनुमान जी का विशेष नाम है | अगर हिन्दू है तो आपको हनुमान जी के बारे में पूर्ण जानकारी रखना चाहिए | सबसे मुख्य बात यह है की भगवन राम जी का नाम आता है तो आटोमेटिक भगवन हनुमान का नाम सामने प्रकट हो जाता है |

Bhagwan Hanuman को हिन्दू महाकाव्य रामायण में एक प्रकार के केन्द्रीय व्यक्ति है जो पहले थे और आज भी अमर है | इन्हें वरदान यह मिला है की धरती पर हमेशा भगवान हनुमान को जिन्दा रहना है |

Bhagwan Hanuman
Bhagwan Hanuman

भगवान हनुमान कौन है? Who is Bhagwan Hanuman

Bhagwan Hanuman के माताजी का नाम अंजना और वे केसरी का पुत्र है | वहीं देवताओं में पवन देवता के रूप में वर्णित है, जिसे वायु देव के पुत्र माने जाते है |

आज भी Bhagwan Hanuman का नाम लिए जाते है और पूजे भीं जाते है | अगर हनुमान की अलग – अलग नामो की बात करें तो आपको बता दूँ अंजनी पुत्र, पवन पुत्र, केसरी नंदन, बजरंग बली, महावीर और मारुती नाम से जाने जाते है |

भगवान हनुमान से संबंधित त्यौहार: Festivals related to Bhagwan

भगवान हनुमान जी से संबंधित अन्य पर्व है जो पूरी दुनियां में मनाये जाते है |

महावीर जयंती

रामनवमी

Bhagwan Hanuman जी से संबंधित पाठ

✅Bhagwan Hanuman: श्री बजरंग बाण

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी ।

सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

जन के काज विलम्ब न कीजै ।

आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा ।

सुरसा बद पैठि विस्तारा ॥

आगे जाई लंकिनी रोका ।

मारेहु लात गई सुर लोका ॥

जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।

सीता निरखि परम पद लीन्हा ॥

बाग उजारी सिंधु महं बोरा ।

अति आतुर यम कातर तोरा ॥

अक्षय कुमार मारि संहारा ।

लूम लपेट लंक को जारा ॥

लाह समान लंक जरि गई ।

जय जय धुनि सुर पुर महं भई ॥

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी ।

कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।

आतुर होय दुख हरहु निपाता ॥

जै गिरिधर जै जै सुखसागर ।

सुर समूह समरथ भटनागर ॥

ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।

बैरिहिं मारू बज्र की कीले ॥

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो ।

महाराज प्रभु दास उबारो ॥

ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो ।

बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।

ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥

सत्य होहु हरि शपथ पाय के ।

रामदूत धरु मारु धाय के ॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा ।

दु:ख पावत जन केहि अपराधा ॥

पूजा जप तप नेम अचारा।

नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ॥

वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं ।

तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥

पांय परों कर जोरि मनावौं ।

यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥

जय अंजनि कुमार बलवन्ता ।

शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥

बदन कराल काल कुल घालक ।

राम सहाय सदा प्रति पालक ॥

भूत प्रेत पिशाच निशाचर ।

अग्नि बेताल काल मारी मर ॥

इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की ।

राखु नाथ मरजाद नाम की ॥

जनकसुता हरि दास कहावौ ।

ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥

जय जय जय धुनि होत अकाशा ।

सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ॥

चरण शरण कर जोरि मनावौ ।

यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ॥

उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई ।

पांय परौं कर जोरि मनाई ॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता ।

ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।

ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥

अपने जन को तुरत उबारो ।

सुमिरत होय आनन्द हमारो ॥

यह बजरंग बाण जेहि मारै ।

ताहि कहो फिर कौन उबारै ॥

पाठ करै बजरंग बाण की ।

हनुमत रक्षा करैं प्राण की ॥

यह बजरंग बाण जो जापै ।

तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे ॥

धूप देय अरु जपै हमेशा ।

ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥

॥ दोहा ॥

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ॥

✅Bhagwan Hanuman: श्री हनुमान चालीसा

॥ दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज

निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु

जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके

सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं

हरहु कलेस बिकार ॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी ।

कुमति निवार सुमति के संगी ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै ।

काँधे मूँज जनेउ साजै ॥

शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन ।

तेज प्रताप महा जगवंदन ॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचन्द्र के काज सँवारे ॥

लाय सजीवन लखन जियाए ।

श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना ।

लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहू को डरना ॥

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तै काँपै ॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।

महावीर जब नाम सुनावै ॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

संकट तै हनुमान छुडावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिनके काज सकल तुम साजा ॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥

चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ॥

तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥

और देवता चित्त ना धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥

॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरन,

मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित,

हृदय बसहु सुर भूप ॥

✅Bhagwan Hanuman: संकट मोचन हनुमानाष्टक

॥ हनुमानाष्टक ॥

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,

तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।

ताहि सों त्रास भयो जग को,

यह संकट काहु सों जात न टारो ।

देवन आनि करी बिनती तब,

छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि,

संकटमोचन नाम तिहारो ॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,

जात महाप्रभु पंथ निहारो ।

चौंकि महामुनि साप दियो तब,

चाहिए कौन बिचार बिचारो ।

कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,

सो तुम दास के सोक निवारो ॥

अंगद के संग लेन गए सिय,

खोज कपीस यह बैन उचारो ।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु,

बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।

हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,

लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥

रावण त्रास दई सिय को सब,

राक्षसी सों कही सोक निवारो ।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु,

जाए महा रजनीचर मारो ।

चाहत सीय असोक सों आगि सु,

दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब,

प्राण तजे सुत रावन मारो ।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत,

तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।

आनि सजीवन हाथ दई तब,

लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥

रावन युद्ध अजान कियो तब,

नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,

मोह भयो यह संकट भारो I

आनि खगेस तबै हनुमान जु,

बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,

लै रघुनाथ पताल सिधारो ।

देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,

देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।

जाय सहाय भयो तब ही,

अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥

काज किये बड़ देवन के तुम,

बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।

कौन सो संकट मोर गरीब को,

जो तुमसे नहिं जात है टारो ।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,

जो कछु संकट होय हमारो ॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,

अरु धरि लाल लंगूर ।

वज्र देह दानव दलन,

जय जय जय कपि सूर ॥

Bhagwan Hanuman जी कैसे दीखते थे ?

भगवान हनुमान जी तो भगवान है ही इनके रूप भी निराले है | Bhagwan Hanuman जी का एक अलग रूप है लेकिन Bhagwan Hanuman को वानर के जैसा बताया गया है लेकिन वानर नहीं है | वहीं का वानर का अर्थ बंदर होता है, मतलब की वन में रहने वाले जीव जो वन में भोजन करते है उन्हें वानर ही कहा जाता है |

वानर को एक मुड़ी हुई पूंछ होती है जो इसी तरह से ही Bhagwan Hanuman को चित्रित किया गया है, वहीं Bhagwan Hanuman Ji को गदा के साथ भी चित्रित किए गए है |

इस आर्टिकल में Bhagwan Hanuman जी का परिचय बताया गया है, अगर आपको भगवान से संबंधित जानकारी अच्छी लगी तो शेयर करें और ज्यादा समझने के लिए विडियो को जरुर देखें |

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