508 assignment

Deled course 508 Assignment 3 Question 2 with Answer

Last Updated on 4 वर्ष by Abhishek Kumar

Deled course 508 Assignment 3 Question 2 with Answer – प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांत क्या हैं ? रक्त स्त्राव और बेहोस होने पर बालक को प्राथमिक चिकित्सा कैसे दी जानी चाहिए ? स्पष्ट कीजिए |
इस पोस्ट में course 508 Assignment 3 के दुसरे प्रश्न का उत्तर लाया हूँ इसे आप असाइनमेंट कॉपी में wright कर सकते हैं | इस प्रश्न के उत्तर स्वयं के ज्ञान और nios के गाइड अनुसार लिखा हूँ इसमे कोई गलतियाँ दिखे तो सुधार या बदलाव कर सकतें हैं |

Deled course 508 Assignment 3 Question 2 with Answer

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course 508 Assignment 3 के दुसरे प्रश्न का उत्तर |

Q. 2) प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांत क्या हैं ? रक्त स्त्राव और बेहोस होने पर बालक को प्राथमिक चिकित्सा कैसे दी जानी चाहिए ? स्पष्ट कीजिए |
उत्तर :- शरीरिक और चिकित्सीय सावधनी को प्राथमिक चिकित्सा कहा जाता हैं | यधपि प्राथमिक चिकित्सा का उद्देश्य मिमारी का इलाज करना नहीं हैं | किन्तु यह पीड़ित को कई प्रकार से सहायता करता हैं | यह जीवन बचाता हैं | वीमारी या कष्ट की वृद्धि रोकता हैं | स्वास्थ्य लाभ में सहायता करता हैं |
यधपि हम सुरक्षा नियमो का अनुकरण करते हैं | फिर भी कभी- कभी दुर्घटनाये हो जाती हैं | ऐसी स्थिति में कोई एक दुर्घटना से चोटिल हो जाए तो हम एकाएक डॉक्टर के पास नहीं पहुँच सकते | उपयुक्त चिकित्सा सहायता पहुँचाने के पहले चोटिल व्यक्ति को जरुरी इलाज दी जाती हैं |

प्राथमिक सहायता के सिद्धांत :-

प्राथमिक सहायता के कुछ ऐसे सिधांत होते हैं जिनका यदि समय पर पालन किया जाए तो दुर्घटनाएं के प्रकोप से बचने में सहायता मिल सकती हैं तथा जीवन को बचाया जा सकता हैं |
  • खुली हवा लगने दे :- घायल स्थिति में मरीज में भीड़ से दूर रखना चाहिए ताकि प्रकृति का हवा मरीज तक बहुंच सके | बहुत भीड़ को देखकर चोट ग्रस्त व्यक्ति घबड़ाने लगता हैं | ऐसी स्थिति में उन्हें एकांत में छोड़ देना चाहिए | जहा तक संभव हो तो ठीक होने की हौसला देना चाहिए |
  • प्राथमिक सर्वेक्षण के लिए ABC का प्रयोग करें :- प्राथमिक सहायता देने वाले को अगर इस सहायता के abc का ज्ञान हैं | तो तुरंत इसको अमल में लाना चाहिए | उपयुक्त सिधान्तो के अनुसार सबसे पहले घायल व्यक्ति को गले का निरिक्षण कर लेना चाहिए | मुह में कोई किसी वजह से रुकावट तो नही हैं | इसके बाद मरीज को स्वांस का निरिक्षण करना चाहिए | की उनकी स्वसन क्रिया ठीक चल रही हैं या नहीं |
  • चोट गंभीर होने पर डॉक्टर को बुलाएँ :- अगर मरीज को अधिक चोट लगी है तो तुरंत अनुभवी डॉक्टर से चिकत्सीय सलाह लेना चाहिए | डॉक्टर के कार्य या उत्तरदायित्व निभाने का कभी भी प्रयास नहीं करना चाहिए |उसे बिगड़ी हुई प्रस्थिति को उस समय तक नियंत्रण करना हैं | जबतक डॉक्टर की सेवाए उपलब्ध न हो जाए |
  • जरुरत से ज्यादा कपडे न हटायें |
  • परिवहन की व्यवस्था :- कभी – कभी मरीज ऐसे जगह होते है जहाँ पर चिकित्सा के लिए कोई परिवहन नही होती है उस जगह पर साथी या दोस्त के मदद से मरीज को चिकित्सालय पहुचना चाहिए | ताकि मरीज को समय पर इलाज हो सकें |
  • घरवालों को सूचित करें :- ऐसी स्थिति में मिली हुई पते पर या टेलीफ़ोन नंबर पर परिवार वालो को सूचित करना चाहिए इससे वो अच्छे से अच्छे हॉस्पिटल में इलाज क्र सके तथा सही से देखभाल करें |

रक्तस्त्राव होने पर :-

कोशिका रक्तस्त्राव में घाव को बाँडेज से कसकर बांध देना चाहिए | घम्नी रक्तस्त्राव में अपने अन्गोठे के रक्तस्त्राव के स्थान पर घमनी के उपरी भाग पर जोर से दबाएँ | नस के रक्तस्त्राव में जटिल भाग को ह्रदय के स्तर से ऊपर उठाये और घाव से दूरस्थ नस के भाग पर दबाये | नक् के रक्तस्त्राव के मामले में सर के पीछे जाना चाहिए | मुह से स्वांस लेने के साथ – साथ मुह पर एक बर्फ रखना चाहिए |

बेहोशी में :-

बेहोशी के हालत में बच्चे को निचे लेता देना चाहिए | भीड़ को अलग हटाकर तजि हवा आने देना चाहिए ताकि बच्चे को स्वांश लेने में कोई तकलीफ न हो | उसके गर्दन को दाएँ – बाएं करना जरुरी होता हैं | इसके बाद भी बेहोशी में रहे तो ह्रदय में हवा देना चाहिए | बच्चा ठीक हो जाए तो चाय देना चाहिए |

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